क्या सीबीआई में आपको gun दी जाती है?

99 प्रतिशत मामलों में नहीं।

सीबीआई एक जांच एजेंसी है। स्थानीय पुलिस के विपरीत, इसमें कानून और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी नहीं है। नतीजतन, यह संभावना अत्यधिक कम है कि आपको सीबीआई में कभी कोई हथियार फायर करने की जरूरत पड़ेगी |

सीबीआई को मुख्य रूप से cases दो तरीकों द्वारा मिलते हैं।

1. सुओ मोटो (Suo Moto) (खुद से ही भ्रष्टाचार के मामले दर्ज करना)
2. राज्य सरकार, केंद्र सरकार, उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश द्वारा।

1. सुओ मोटो (Suo Moto)

पहली तरीके के मामलों में, सीबीआई केवल लोक सेवकों (पब्लिक सर्वेन्ट) द्वारा किए गए भ्रष्टाचार के मामलों को दर्ज करती है। चूंकि आम तौर पर, लोक सेवक कुख्यात प्रकार (खूंखार) नहीं होते हैं जो किसी हथियार का प्रयोग कर सकते हैं, या जो की जांच प्रक्रिया में हंगामा पैदा करते हैं, इसलिए सीबीआई को उनसे निपटने के लिए एक हथियार की आवश्यकता नहीं है। सीबीआई का नाम एक लोक सेवक को डराने के लिए पर्याप्त है और वे बिना किसी जोर-जबरदस्ती के विभाग के साथ सहयोग करते हैं।

इन मामलों में जांच एक साधारण civilian प्रकृति की है और लगभग सभी आरोपी हाई प्रोफाइल नागरिक या लोक सेवक हैं। इन मामलों की यह प्रकृति सीबीआई अधिकारियों द्वारा एक हथियार ले जाने के लिए अनुपयुक्त है।

यद्यपि यह कभी-कभी trap cases में होता है कि आरोपी सहयोग न करके सीबीआई अधिकारियों द्वारा बल के प्रयोग को अनिवार्य करता है, लेकिन फिर भी हथियार सीबीआई में प्रतिबंधित है। इस तरह के शारीरिक प्रतिरोध को केवल शारीरिक रूप से ही निपटाया जाना चाहिए। किसी अधिकारी द्वारा किसी हथियार को ले जाना किसी अनावश्यक क्रोध में ऐसे क्षणों को रक्तरंजित बना सकता है जिसे किसी भी कीमत पर नहीं होने देना चाहिए ।

राज्य सरकार, केंद्र सरकार, उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश द्वारा

ये मामला किसी भी प्रकृति का हो सकता है यानी भ्रष्टाचार का मामला, आर्थिक अपराध का मामला या एक विशेष अपराध (स्पेशल क्राइम) का मामला। पहले 2 आम तौर पर हानिरहित हैं लेकिन तीसरे में कुछ कुख्यात अभियुक्त शामिल हो सकते हैं। परंतु यहाँ भी एक बात मन को तसल्ली देने वाली है कि इस तरीके के केस स्थानीय पुलिस द्वारा प्राथमिक अन्वेषण करने के बाद तथा साक्ष्य एकत्र करने, प्रारंभिक रिपोर्ट बनाने और संदिग्धों को गिरफ्तार करने के बाद ही ये मामलों को सीबीआई को स्थानांतरित किया जाता है। अन्य संदिग्ध या आरोपी व्यक्ति जो फरार हैं, वो भी अत्यधिक सावधान रहते हैं और ऐसी कोई गलती नहीं करते हैं जिससे की उनकी पहचान बेनकाब हो सके | इसलिए ये मामले भी सीबीआई अधिकारियों द्वारा एक हथियार ले जाने के लिए अनावश्यक हैं |

एक छापे पर भी, सीबीआई के अधिकारी अपने साथ एक हथियार नहीं ले जाते हैं। सीबीआई का नाम अपने आप में एक ऐसी ताकत है जिसकी वजह से आपको हथियार की 99 प्रतिशत बार जरूरत नहीं पड़ेगी। मैंने कहा 99% क्योंकि 1% cases इस तरीके के भी होते हैं कि आवश्यकता हो सकती है ।

कभी-कभी ऐसा भी होता है कि सीबीआई की विशेष इकाई शाखा (एसयू) ने कुछ विश्वसनीय इनपुट एकत्र किए हैं कि कुछ लोगों द्वारा नकली नोटों को इस इस जगह पर प्रसारित किया जाना है। यदि यह जानकारी सही है, तो इस रैकेट का भंडाफोड़ करने की आवश्यकता है। ऐसे मामलों में, 5-6 सदस्यों की एक टीम बनाई जाती है और सिर्फ अनुभवी लोगों को ही उनके नाम पर हथियार आवंटित किए जाते हैं। इस तरह के पर्दाफाश ऑपरेशन में su के द्वारा तुरंत दी जाने वाली जानकारी पर टीम को घटनास्थल पर तत्काल कार्रवाई करनी पड़ सकती है। ऐसे मामलों में, यह जरूरी हो जाता है कि टीम के सदस्यों को किसी भी आपात स्थिति के लिए हथियार आवंटित किए जाएं। लेकिन ऐसे मामले बहुत काम आते हैं लगभग 200 मामलों एक बार । सामन्यात जो हथियार दिया जाता है वह पिस्तौल होता है।

CBI के नाम का इतना प्रभाव है कि अन्य विभागों के विपरीत, CBI अधिकारी स्थानीय पुलिस को अपने साथ Raids पर भी नहीं ले जाते हैं | क्योंकि यह उनके साथ होने के लिए एक ओवरकिल है। ऐसा करने का एक और कारण यह है कि लोकल पुलिस वालों को पहले से कुछ भी बताना बहुत जोखिम भरा है; यहां तक ​​कि सीबीआई द्वारा एक संभावित छापे का उल्लेख भी मीडियाकर्मियों को सावधान कर सकता है और खबर जंगल की आग की तरह फैल सकती है, जिससे हर कोई सतर्क हो सकता है।

यद्यपि जब आप एक सब-इंस्पेक्टर के पद पर भर्ती होते हैं, तो आपको 5 दिनों के लिए हथियार प्रशिक्षण दिया जाएगा क्युकी सीबीआई एक पुलिस department है तथा यह हर एक पुलिस डिपार्ट्मन्ट की ट्रैनिंग का फीचर होता है की वे हथियार प्रशिक्षण दें । वे प्रशिक्षण देने के लिए ग्लॉक पिस्तौल का उपयोग करते हैं। ग्लॉक पिस्तौल नवीनतम हथियार हैं जिनका उपयोग अमेरिका में बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।

इन सबके अंत में में यही कहना चाहूँगा कि हथियार अपने साथ ले जाने के लिए एक बोझ है। यह किसी भी उद्देश्य की पूर्ति नहीं करता है इसलिए इसकी सीबीआई में 99% बार जरूरत नहीं पड़ती ।

पढ़ने के लिए धन्यवाद।

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